यूँ तो अभी तीन दिन बांकी हैं लेकिन मेरी सोसाइटी के

यूँ तो अभी तीन दिन बांकी हैं लेकिन मेरी सोसाइटी के व्हाट्स एप ग्रुप में Velantine Day को लेकर विवाद चरम पर है. लगभग आधे लोगों को इस बार यह दिवस भी सेलिब्रेट करना है. वामपंथियों की तरह ये गुट बिलकुल एकजुट है. उधर जो लोग विरोध में हैं उनमे से आधे ही मुखर हैं. ये लोग दबी जबान में इसका विरोध कर रहे. बांकी मेरे जैसे कुछ गुम्मा लोग उदासीन ही हैं. एक व्यक्ति जिसने इसे सनातन के विरोध में कहा उसके कमेन्ट पर तीन लोगों ने हँसने की इमोजी वाला रिएक्शन दिया है.

मैं किसी के विरोध या समर्थन में नहीं हूँ. असल में मेरे पास इन सबपर खर्चने को समय ही नहीं है. मैं अपनी समस्याओं के साथ ही खुश हूँ… आगे जब जो आएगा देखेंगे. किसी दिवस या अन्य आयोजन पर शुरू से मेरा मत यही रहा है कि यदि आप अपने भूत, वर्तमान और भविष्य को कलुषित नहीं कर रहे और उससे आपको ख़ुशी मिल रही तो कर लें. हम ईश्वर द्वारा दिए आकार और जीवन को जी रहे सो हमें खुश देखकर ईश्वर को प्रसन्नता ही होगी.

वैसे हमारे समय में मात्र एक नजर देखना वैलेंटाइन हो जाया करता था… गुलाब देना अति हो जाती थी और चिट्ठी लिखना तो क्रांति !

Movierulz

फ़िलहाल ग्रुप में विरोध वाले मुखर हो रहे. वो जय श्री राम लिखने लगे हैं. एक ने तो ज्ञानवापी मंदिर में पूजा वाला विडियो भी शेयर कर दिया है. विरोधी पक्ष के कुछ लोगों ने Valantine उत्सव में आयोजन हेतु अपना पार्किंग एरिया नहीं देने की घोषणा भी कर दी है. कुछ अपने बालकनी के सामने पंडाल की रस्सी नहीं देखना चाह रहे… एक भाई ने तो बीमार होने की बात करके Sound System के खिलाफ भी विरोधी स्वर उठा दिया है. मामला संगीन होता जा रहा है…

उधर पत्नी जी वाले लेडीज ग्रुप में जहाँ ब्यूटी पार्लर और ड्रेस को लेकर बातें हो रही है वही किसी ने मेरी पत्नी से शिकायत की है कि झा साहब तो किसी से बात ही नहीं करते…

हाँ तो मैं अपनी समस्याओं की बात कर रहा था. फ़िलहाल श्रेया के आग्रह पर मैंने पठान के “झूमें जो पठान” गाने पर स्टेप करने की कोशिश में एक नई समस्या बुला ली है. दरअसल कई दिनों से कोशिश कर रहा था. आज ध्यान आया की अरे ये तो सन्नी देओल के जीत सिनेमा का स्टेप है, बस इसमें एक हाथ नीचे पटकना है. पटकना ठीक से नहीं आ पा रहा था… किसी जान व् छोना बाबु द्वारा एक्सचेंज किये गुलाब को सड़क पर फेंकना याद किया फिर भी न हुआ, किसी मिथलानी द्वारा तुनकमिजाजी में नाक भान्गना भी ट्राय किया मगर ये भी काम न आया.

धोनी अपनी टीम में अगर किसी को नही चाहते थे तो वो इसके लिए बहुत स्पष्ट थे

आख़िरकार पत्नी जी ही काम आई… दरअसल पटकने को हाथ में फील देने को पत्नी का एक मंहगा मेकअप का सामान ले लिया था हाथ में… टूट गया. समस्या तब हुई जब टूटे सामान को छुपाते श्रेया ने देख लिया और चुगलखोर लड़की ने घर आसमान में उठा लिया… खैर, आप सब हँसते मुस्कुराते रहिये… जो बात ख़ुशी दे वो करिए… मुझे कुछ गिफ्ट करिए… अच्छा लगेगा… धन्यवाद !
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नोट – तस्वीर वाला आदमी दिल्ली से मिथिला मैथिली करते भाग लिया, आज अपने स्कूल का प्रिंसिपल है, पहचानते ही टैग करें.

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