वो दस घण्टे बिना कवर ड्राइव के

वो दस घण्टे बिना कवर ड्राइव के, वर्ल्ड कप के तक सब कुछ ठीक था मेरी फॉर्म अच्छी थी बस अनामिका उंगली में कैल्शियम जमा होने की वजह से उसका आपरेशन करवाना पड़ा ..!!

मुझे चार पांच महीने क्रिकेट से दूर रहना पड़ा तो बांग्लादेश का एक दौरा छूट गया। उसके बाद

टीम ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर थी समय था 2003-04..

पहला टेस्ट मैंने केवल तीन गेंदे खेलीं और गिलेस्पी ने मुझे एलबीडबल्यू करके चलता किया। हालांकि मुझे लग रहा था गेंद स्टंप से लगभग छः इंच ऊपर निकलती। मुझे बिना खाता खोले पवेलियन जाना पड़ा। लक्ष्मण ने सम्हाला पारी को फिर इस मैच में गांगुली ने पहली बार आस्ट्रेलिया में कप्तानी करते हुए 144 रनों की नायब पारी खेली।

दूसरी पारी में मेरा नम्बर नही आया।

मैच ड्रा पर छूटा….!!

दूसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने जानदार शुरुवात की 556 रन बनाए पर यह मैच कुछ कुछ 2001 में राहुल और लक्ष्मण की खेली गई पारियों की कुछ कुछ याद दिलाता रहा .. बस फर्क था कि यहाँ राहुल ने दोहरा शतक जड़ा और लक्ष्मण ने शतक।

मैंने केवल छः गेंदे खेलीं और एंडी बिशेल ने पीछ कैच करवा दिया।

Movierulz (1)

दूसरी पारी तो आगरकर के नाम रही 41/6 और 196 पर आउट करके हमको अब केवल 230 रन ही चाहिए था..

मैंने दूसरी पारी में एलबीडबल्यू होने से पहले जरूरी 37 रन बनाए जो संतुष्टिजनक तो था पर मुझे सही नही लग रहा था।

विजयी रन द्रविड़ ने बनाया ..

हम सीरीज में 1-0 से आगे ….!!

तीसरे मैच में सहवाग ने जो पारी खेली 195 रन की वह केवल वही खेल सकते हैं। पर उसका ज्यादा फायदा नही हुआ पांच बल्लेबाज शून्य पर आउट थे और 366 पर टीम आउट..

मैंने भी केवल एक गेंद खेली और ब्रेटली ने मुझे आसानी से विकेट के पीछे कैच कराया। यह आउट होने का सबसे बेकार तरीका था जब सबसे ज्यादा लज्जा महसूस हुई मुझे।

अव्वल तो चंद्रयान 3 सच्ची में उतरा भी है कि नहीं इसी पर डाउट होना चाहिए।

ऑस्ट्रेलिया ने एकदम सधा खेल खेला और 558 रन बनाए.. पोंटिंग दोहरा, और हेडेन शतक।

पहली पारी के आधार पर हम दो सौर रन पीछे।

दूसरी पारी में हमको बेहतर खेलना था पर 44 रन पर ब्रैड विलियम्स ने पीछे आउट करा दिया। यह मैच हम हारे।

1-1 से श्रृंखला बराबर।

सब कुछ चौथे टेस्ट पर निर्भर था।

अजीत भाई से चर्चा हुई कि जैसे ही गियर बदलने की कोशिश की गई तुरन्त मैं आउट हो गया। भाई बोले कि तुम अपना विकेट लेने के लिए मेहनत नही करा रहे हो तुम उनको विकेट दे रहे हो। जॉन राइट ने भी मुझसे बात चीत के दौरान काफी सकारात्मकता और आत्मविश्वाश भरा।

मैंने चुनौती स्वीकार की।

यह मेरे करियर की सबसे मुश्किल परियों में से एक रही क्योंकि पहली पारी में मैंने क्रीज पर दस घण्टे बिताये और एक भी कवर ड्राइव नही खेला.. गेंदबाजों ने तंज कसा.. और जब गेंदे कवर ड्राइव कर लिए ललचा रही थीं तो मैं सहज रूप से खड़ा रहा.. टीम 700 के पार थी और मैं 241* बनाये..

दूसरी पारी में भी मैं नाबाद आया..

यह स्टीव वॉ का आखिरी मैच भी था ..

हमने दूसरी पारी की घोषणा करने में सही फैसला लिया होता तो हम सीरीज जीत सकते थे.. परिणाम स्वरूप यह टेस्ट ड्रा हो गया।

मैंने 613 मिनट क्रीज पर बिताये और लगभग साढ़े सत्रह सौ रन बने पर बिना नतीजे के मैच रहा।

इस मैच से जुड़ा एक मजेदार वाकया है कि मैच से एक दिन पहले हम एक मलेशियन रेस्त्रां पर गए थे। तो अगले दिन मैं 73 पर नाबाद था। दूसरे दिन मैं फिर दोस्तों के साथ गया तो वही टेबल और वही आर्डर …

पर जब 230 पर नाबाद था तो तीसरी बार गया.

वो बौखला उठा क्योंकि वही टेबल और वही ऑर्डर…

पर उसको चौथे दिन तक यह नही पता लग पाया कि कारण क्या था उसको लगा कि हम उसके लजीज व्यंजन के कायल थे।

मैं कभी कभी अनावश्यक रूप से अंधविश्वासी हो जाया करता था।

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