Shaitan Movie: पिछले एक दशक में अजय तीसरी बार अपनी बेटी को बचाने निकले है

Shaitan Movie: इंतजार में था कि क्लाईमेक्स में रोडवेज बसों में विज्ञापन वाला कोई बाबा वशीकरण से मुक्त करने आएँगे। खैर भले फिल्म गुजराती वश का हिन्दी रीमेक है, लेकिन निर्देशक ने अपने संस्करण के किरदारों को कलाकार उम्दा दिये है। या कहे भारतीय सिने जगत के दिग्गज ऐक्टर्स। चूँकि जानकी बोड़ीवाला ओरिजनल में जाह्नवी कर चुकी थी तो उन्हें अपने किरदार से दोबारा मिलने में दिक्कत न हुई, बल्कि मूल वर्जन में इक्कीस थी। क्योंकि भाषाई परिवेश का फर्क पड़ता है, इससे हाव-भाव में हल्का अंतर आता है फिर भी ज्यादा चेंज नहीं लगा।

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लेकिन…लेकिन! मैडी उफ़्फ, शैतान वनराज से जिस अंदाज में मिलें है अद्भुत, बॉडी लैंगवेज में हाव-भाव से पूरा खेले है। डर, इमोशन, टेंशन, कॉमिक, निर्ममता मने सभी एक्सप्रेशन देते है। आर माधवन अपने किरदारों के लिए गहराई तक पहुँचते है, अगर किरदार अच्छे से लिखा तो मैडी का बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन परफॉरमेंस में हैरान कर देता है। सामने कलाकार दमदार हो तो दुगुनी मेहनत से किरदार के पास जाते है। फिल्म के क्लाइमेक्स में माधवन को देखकर ऐसा लगा कि रावण किरदार से मिलने का अवसर दिया जाये तो यादगार बना देंगे।

Shaitan Movie
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फिल्म में माधवन के हिस्से सिर्फ फेसिअल एक्सप्रेशन से अपने किरदार को रखना था और वनराज को देख लें। क्या थ्रिल क्रिएट किया है। इन्हें ऐसे किरदार मिलते नहीं है। रॉकेट्री और विक्रम वेधा के बाद शैतान (Shaitan Movie) मिला है और मैडी ने सारी भड़ास निकाल दी है। कबीर यानी अजय देवगन, अहा, लेखक ने सीमित डायलॉग रखें है और कैमरे का फोकस इनकी गहरी आँखों पर टिकाये रखा है। देवगन को आँखें ही हर भाव को कह जाती है संवाद हो या न हो, दर्शक सीधे आँखों से कनेक्ट कर जाते है। किंतु अजय अपने किरदारों को उचित वक्त नहीं दे रहे है सेम टू सेम है।

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दृश्यम उठा लें और इसे देखें, काफी समानता लगेगी। पिछले एक दशक में अजय तीसरी बार अपनी बेटी को बचाने निकले है, न जाने किसकी नज़र लग गई है। ज्योतिका, एक्शन सीक्वेंस इनके किरदार को मिले है। कमाल की अभिनेत्री है, अपने किरदार ज्योति में जान डाल दी है। अजय-माधवन और ज्योतिका की जुगलबंदी अच्छी बैठी है लेखक-निर्देशक ने फेसिअल एक्सप्रेशन के साथ खेला है, डायलॉगबाजी से परहेज किया है।

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दरअसल, कंटेंट ही उस रेंज में लिखा गया है। स्क्रीन प्ले ग्रिपिंग और थ्रिलिंग है। बांधे रखता है, लेकिन ओरिजनल तो ओरिजनल होता है। तीनों कलाकारों के अभिनय जौहर देखना है तो निराशा हाथ न लगेगी। अगर गुजराती वर्जन देख रखा है तो उन्नीस प्रतीत होगी। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ठीकठाक कर जाएगी। क्योंकि इसका इतना बज नहीं था, सबकुछ फ़ास्ट पेस में हुआ है विकास बहल गणपत को छोड़कर इसे प्रमोट करते तो फायदा देती।

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