नेटफ्लिक्स की नई पेशकश ‘Maamla Legal Hai’ में रवि को देखिए

Maamla Legal Hai: तीस-बत्तीस साल के फिल्मी करियर और 54 वर्ष की उम्र में कोई अभिनेता ये कहे कि, ‘बॉलीवुड से मेरी लॉंचिंग फिल्म है’ दरअसल, इन दिनों जिंदगी झंडवा, फिर भी घमंडवा संवाद के धारक रवि किशन अपने सार्वजनिक जीवन में सबसे पीक पर है। सिने जगत हो या राजनीतिक पटल दोनों ओर से सुर्खियों में बैठें है।

Maamla Legal Hai

राजनीति में आगामी लोकसभा चुनाव में पुनः गोरखपुर से सांसदी टिकट मिल गया है। तो वही सिनेमा से नजदीकी सिनेमाघरों में लापता लेडीज और ओटीटी नेटफ्लिक्स पर मामला लीगल है। सिने जगत और राजनीति ने चर्चा का केंद्र बना दिया है। रवि किशन अपने इंटरव्यू में कहते है, हिन्दी में ये मेरी लॉंच फिल्म है, तब उनकी आँखों में जो चमक, कसक दिखाई दी। मानो कलाकार को पूर्णता की पहली सीढ़ी मिल गई।

भोजपुरी सुपरस्टार आगे कहते है, ‘मैं चाहता था कि कहानी की शुरूआत से लेकर क्लाईमेक्स तक उपस्थित रहने वाला दमदार किरदार मिले और लापता लेडीज में मनोहर से मिला तो लगा, हिन्दी में डेब्यू कर रहा हूँ’ जानते ऐसा काहे है। नब्बे के दशक से बॉलीवुड में संघर्ष कर रहा कलाकार अच्छे किरदारों की तलाश में भटकता रहा। उन्हें ट्रांसफॉर्मेशन देने के लिए तड़पता रहा, कि कोई फिल्म मेकर उन्हें जिंदगी झंड कर देने वाला किरदार दें और अपना अभिनय जौहर दिखला सके।

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यकीनन संघर्ष के कोलू से कुछ न कुछ तो निकलेगा ही तो किरदार भी निकले, लेकिन उनमें कोई दम वाली बात न थी। तभी तो हिन्दी, साउथ ब्लॉक और फिर भोजपुरी सिनेमा में घूमते रहे, फोकस लाइट पड़ सके, इसलिए बिग बॉस जा पहुँचे। वहाँ रवि अपने भोजपुरिया एसेंट वाले डायलॉग से लाइम लाइट में आये तो सही परंतु ज्यादा फर्क न पड़ा। इस कसरत से किरदारों के आने की स्पीड तो थोड़ी बढ़ी थी लेकिन जो इस कलाकार को चाहिए था नहीं मिल सका। फिर भी रवि अपने हर किरदार से ऐसे मिले, जो कम स्क्रीन प्रिजेंस में नोटिफिकेशन जनरेट करते गये।

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1971 से कैप्टन जैकब, वेलकम टू सज्जनपुर से राम कुमार, लक के राघव रघुवरण, बाटला हाउस से मोहन चंद शर्मा किरदारों को रवि ने दर्शकों के बीच रखा, टाइम लाइन भले कम थी लेकिन इंपैक्ट पूरा था। दर्शकों ने नोटिस किया। रवि किशन के अभिनय की जो क्षमता है न, ऐसा कोई किरदार नहीं होगा, जिसे बढ़िया से बॉडी स्पेस न दे सके। बशर्ते लेखन में किरदार अच्छे से डिटेल्ड हो और निर्देशक किरदार को निकलवा लें। किशन ऐसे लेखक और निर्देशक का बेसब्री से इंतजार कर रहे है कोई आएगा। लेकिन टैलेंटलेस भीड़ में ऐसी प्रतिभाओं का गला घोंट डाला है।

नेटफ्लिक्स की नई पेशकश ‘Maamla Legal Hai’ में रवि को देखिए, वकील-जज वीडी त्यागी से कैसे मिलें है। सोलो कंटेंट को बेहतरीन तरीके से अपने कंधों पर खींचने की स्किल रखते है। मेरा मानना है तमिल सेतु की हिन्दी रिमेक तेरे नाम में राधे रवि से मिला होता तो कमाल-धमाल कर देता। सलमान खान से कई गुना अच्छा किरदार निकलता, लेकिन ऐसा हुआ नहीं, साइड किरदार रामेश्वर मिला।

इसे भी अच्छा कर गये और याद रखने वाला बना दिया। कलाकार वही है जो किरदार की माँग में खुद को भूल जाए, पर्दे पर कलाकार नहीं किरदार दिखाई दें। लापता लेडीज में मनोहर की प्रशंसा के कारण में रवि का अपने किरदार के प्रति समर्पण लिखा है, हालाँकि मनोहर उनके जोन से निकला किरदार है। फिर भी मेहनत तो उसी स्केल पर हुई है।

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रवि ने अपना गोल्डन टाइम बॉलीवुड के स्ट्रगल में बिता दिया और भोजपुरी सिनेमा के स्टारडम से भारतीय राजनीति में लोकसभा सांसद बन गए है। व्यस्त शेड्यूल में भी किरदारों को उचित समय दे रहे है और स्क्रीन पर दिखाई भी पड़ रहा है। अभी रवि किशन से मेथड फॉर्मेट के द्वारा लाइफ टाइम अचीवमेंट में आखिरी किरदार बाकी है जिसे सिनेमाई इतिहास सदैव याद करेगा।

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ऐसा होने में कितना वक्त लगेगा, वाकई कोई लेखक-फ़िल्म मेकर रवि के लिए उनके एटीट्यूड से भिन्न किरदार लिखकर देगा या फिर उम्दा कलाकार यूँ ही व्यर्थ होगा। किरदार के शेड्स कोई सरोकार नहीं है बस कहानी नायक वाले कंटेंट में फुल लेंथ किरदार मिले और रवि उसे ट्रांसफॉर्म करें। यूपी पूर्वांचल और बिहार जोन से नब्बे के दशक में कलाकार आये है न, मनोज वाजपेयी के टक्कर में सिर्फ रवि किशन खड़े है। पंकज त्रिपाठी कोसो दूर है। मिर्जापुर में रवि अखंडा रहते तो जलवा अलग होता है। बॉलीवुड ने इन्हें कभी गंभीरता से नहीं लिया तिस पर इनकी मेहनत में कोई कमी न थी न है।

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