कल लगभग आधी रात बैडमिंटन खेलते पत्नी ने उस गाने का पूछा

कल लगभग आधी रात बैडमिंटन खेलते पत्नी ने उस गाने का पूछा जो बैडमिंटन खेलते जितेन्द्र और लीना चन्द्वारकर पर फिल्माया गया है. मैंने कहा – “ढल गया दिन – हमजोली फिल्म से” बात को बदलते मैंने कहा – तुम्हारा नाती राहुल गाँधी तो ‘मोहब्बत की दुकान’ खोल रहा फिर से. छुटते ही पत्नी ने कहा – आपसे सीखता तो कुछ फायदा भी होता.

अचानक से पिन ड्राप सायलेंस हो गया वातावरण में. फोन कॉल, मैसेज, व्हाट्स एप कॉल, बैंक अकाउंट सम्बन्धी डिटेल… सब मेरी आँखों के सामने तैर गया थोड़ी देर को. अमूनन ऐसे मौकों पर कश्मीरी सेव सरीखे लाल होते मेरे चेहरे को भांपते पत्नी जी खिलखिलाती बोलीं – “अरे मैंने कुछ नहीं देखा सुना, वैसे चेहरा बता रहा है कुछ गड़बड़ है. या तो किसी को कुछ ट्रान्सफर हुआ है या फिर किसी से कोई गॉसिप”

मैंने चैन की सांस लेते विमर्श को बौद्धिकता की ओर मोड़ने की कोशिश में कहा – मैं जब कॉलेज में पढता था तो किसी किताब में पढ़ा था – “पुरुष सारी उम्र पत्नी के सामने स्वयं को अधिक बुद्धिमान साबित करने में और स्त्री ताउम्र पुरुष को अपने वश में करने के प्रयास में गुजार देते हैं. जबकि पुरुष स्वयं को औरत सा ही सामान्य और समान जीव मान ले और स्त्री उसे मुक्त कर दे तो दोनों का जीवन सहज और आसान हो जाए.”

Movierulz

पत्नी जी चुप हो कॉर्क को इधर उधर मारने लगीं. मैं भी खामोश ही रहा. अब स्त्री मन को ब्रह्मा नहीं समझ पाए तो अपन किस खेत की मूली हैं… वो कब क्या क्यों और किस निहितार्थ कहती हैं खुद उसे नहीं पता होता.. वो जो कहती हैं वो कितनी देर को सही होता है और किसके लिए सही होता है खुद उसे नहीं पता होता… खुद के कहे बात को अपने हिसाब से कह दे – “अरे मेरा ये मतलब थोड़े ना था…”

धोनी अपनी टीम में अगर किसी को नही चाहते थे तो वो इसके लिए बहुत स्पष्ट थे

और इस बात का भान मुझे तब हुआ जब आज सुबह मेरे फोन की पड़ताल हुई. कुछ संवाद और कॉल पर कुछेक स्पष्टीकरण के उपरांत अंत में जो एक सवाल का जवाब बांकी रहा वो था – “ये कैश निकाल कर कहाँ गया…?”

जो बातें सोच रहा – नींद में भी फेसएप्प से फोन क्यों खुल जाता है भला ? चंदे का सच बता दूँ ? शौपिंग पर ले जाऊं ?

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