जब आयुष्मान को लोग वन फिल्म वन्डर कहने ही लगे थे

2012 में, जब heroism सिनेमा पर हद से ज़्यादा हावी था, तब जूही चतुर्वेदी की राइटिंग, शूजीत सरकार का डिरेक्शिन और अन्नू कपूर की बेहतरीन एक्टिंग के सपोर्ट ने आयुष्मान खुराना को रातों-रात स्टार बना दिया।

इसके 3 साल बाद, जब आयुष्मान को लोग वन फिल्म वन्डर कहने ही लगे थे, तब ‘दम लगा के हइशा’ जैसी यूनीक फिल्म ने उनके करिअर को ऐसा पीक दिया कि जहाँ से वापसी की आशंकाएं भी खत्म हो गई।

इसके बाद तो बरेली की बर्फ़ी, शुभ मंगल सावधान, अंधाधुन, बधाई हो या आर्टिकल 15, आयुष्मान को एक से बढ़कर एक टॉपिक मिलते रहे और वो कामयाबी की नई उचाइयाँ देखते रहे। 2019 में आईं ड्रीमगर्ल और बाला, आयुष्मान के करिअर की एवरेस्ट साबित हुईं क्योंकि इसके बाद से अपने हीरो ने वो डाउनfall देखना शुरु किया, जिसकी वह कल्पना करना भी छोड़ चुके थे।

हाँ कुछ तो राजनीति भी हुई कि एक तरफ आयुष्मान खुराना डिप्लोमेटिक होकर सबसे बनाकर रखना चाहने लगे वहीं उनकी वाइफ ताहिरा कश्यप ने वोक और लिबरल कलर का शॉल ओढ़ना शुरु कर दिया।

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कोरोना काल के समय शुभ मंगल ज़्यादा सावधान और गुलाबो सिताबो औंधे मुँह गिरीं। दोनों ही फिल्में निहायती वाहियात किस्म की थीं।

एवरेस्ट पर पहुँचे आदमी के पास सिवाए नीचे उतरने के, और कोई जगह भी नहीं बचती। शुभमंगल ज़्यादा सावधान में समलैंगिता को हवा देने के बाद चंडीगढ़ करे आशिक़ी में ट्रांस वुमेन से मुहब्बत करने का अजेंडा भी औंधे मुँह गिरा। फिर अनुभव सिन्हा ने ही जाने क्या सोचकर अनेक बनाई, उस फिल्म का कोई सिर पैर ही नहीं था, नतीजतन; वो भी फ्लॉप हुई।

कुछ अलग करने की खुजली में अन एक्शन हीरो और डॉक्टर जी जैसी फिल्में भी आयुष्मान के हिस्से आईं, ये पिछली फिल्मों से बेहतर होते हुए भी नहीं चलीं।

हाल ही में फ्रेंचाइज़ फिल्म ड्रीमगर्ल ने बॉक्स ऑफिस के मामले में आयुष्मान को ज़रूर थोड़ी राहत दी पर क्रिटिक्स से इस फिल्म को भी लानतें ही मिलीं।

आयुष्मान खुराना बिलाशक एक अच्छे एक्टर हैं। हाल ही में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में वह आए, अपनी ‘वोक-पटुता’ को किनारे कर उन्होंने जम के ‘जय श्री राम’ के नारे लगाये लेकिन दो दिन बाद ही उनका एक वीडियो वाइरल हो गया जिसमें आयुष्मान दिल-दिल पाकिस्तान गा रहे थे।

वीडियो के fact-check वालों का कहना है कि ये कॉन्सर्ट आज का नहीं, बल्कि 2017 का है। तब दुबई में पाकिस्तानी सिंगर अली ज़फ़र के साथ आयुष्मान ने इंडिया-पाकिस्तान की एकता के नाम पर ये गाने गाए थे। अली-ज़फ़र ने भी चक दे इंडिया गाया था। तो फिर इस कॉन्सर्ट के क्लिप्स अब क्यों वाइरल हो रहे हैं?

2016 में उरी बेस पर पाकिस्तानी आतंकियों के नीच हमले के बाद दोनों देशों के शो ऑर्गनाइज़र्स रूपी गिद्धों ने आपसी एकता के नाम पर दुबई को परमानेंट मंच बनाकर खूब पैसा पीटा था। अब गणित ऐसे काम करती है कि अगर आप एक बार किसी पक्ष की तरफदारी करने लगो, तो आपको उसी का होकर रहना पड़ता है।

पर जैसा कि ऊपर लिखा, आयुष्मान सबसे बनाकर रखना चाहते थे, चाहते हैं। इसीलिए वह कभी हाई फ्लेम फेमनिस्ट हो जाते हैं तो कभी टॉप लेवल के लिबरल। इसी बीच वह कट्टर राम भक्त होने का भी टाइम निकाल लेते हैं।

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ट्विस्ट यहीं है, राक्षस अपना प्रचार करने वाले किसी भी शख्स को वापस भक्त बनता देख ही नहीं पाते। उधर पैसा बहुत है पर वो रास्ता वन वे स्ट्रीट है। अब ऐसे ही किसी हिरस के मारे ने आयुष्मान के पुराने वीडियो को निकालकर बाकायदा पैसा फूँककर वाइरल किया होगा ताकि पब्लिक आयुष्मान का भी बॉइकाट करना शुरु कर दे और ट्विटर/यूट्यूब को देखें तो फिलहाल वो कामयाब भी हो गया।

मैं अपना पक्ष रखूँ तो मेरी नज़र में आयुष्मान बुरा नहीं है। हम जैसे मिडिल क्लास परिवार से ही है। एक आम मिडिलक्लास वालों की तरह हीरो बनना चाहता था, बन गया, अब बने रहना चाहता है।

कुछ न कुछ ऐसा करने की कोशिश करता रहता है जो बाकियों ने न किया हो। ये अलग करने की चुल कभी ब्लॉकबस्टर देती है तो कभी डब्बा गोल हो जाता है। पर actor अच्छा है और इंसान भी बुरा नहीं है। इतना बुरा तो हरगिज़ नहीं है कि देशद्रोही कहलाया जाए।

इतना भी बुरा नहीं कि उसकी फिल्म आने से पहले ही फिल्म पर फैसला सुना दिया जाए।

इतना बुरा तो हरगिज़ नहीं है कि पहले चाइना से फंड और वेटिकन ने कमांड लेकर, पाकिस्तान को दोस्त बताते हुए भारत जोड़ने की यात्राएं करे।

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