धोनी अपनी टीम में अगर किसी को नही चाहते थे तो वो इसके लिए बहुत स्पष्ट थे

धोनी अपनी टीम में अगर किसी को नही चाहते थे तो वो इसके लिए बहुत स्पष्ट थे…

क्योंकि रँनिंग बिटवीन द विकेट्स एक बड़ा मुद्दा था और बॉल्स जिस तरह से डॉट हो रही थी वह सोचनीय था …

और साथ में यह भी कि इनका जो भी फील्डिंग एबिलिटी है उसे अब ये और मजबूत नही कर सकते … वो रँनिंग में अपने रन पूरे कर भी सकते हैं या नही ?? पर रन लेते हुए अपने साथी को रन आउट करवा देंगे क्योंकि अगर ऐसा अनिश्चितता रहेगी तो वो एक डर अपने पार्टनर में भी भर देंगे …

हमेशा से चली आ रही परंपरा, एक ओवर की चार बाल झेलो और आखिर की एक दो गेंद में एक बाउंडरी मार दो और अगली गेंद पर सिंगल या डबल, स्ट्राइक रेट हो गया 90 का …

पर उन डॉट बॉल्स का क्या ??

Movierulz (1)

पर एक सच यह भी था कि फील्डिंग को लेकर धोनी ने सामने से कुछ बोला ही नही ..

और जब धोनी ने पहली बार कॉमनवेल्थ बैंक सीरीज 2007-08 ऑस्ट्रेलिया में टीम को लीड किया …

सब बाहर हुए जो निगाह में थे … !

सामने थी पोंटिंग की टीम और श्रीलंका … !!

ऑस्ट्रेलिया की टीम में कौन नही था .. या श्रीलंका की टीम में ….!!

जब टीम खतरनाक स्थिति में पड़ी तो धोनी ने वह बात कही जो एक कप्तान कहता है कि

अव्वल तो चंद्रयान 3 सच्ची में उतरा भी है कि नहीं इसी पर डाउट होना चाहिए।

“मैंने बहुत बड़े बड़े चेहरों को बाहर बिठाया है केवल तुम लोगों को अंदर लाने के लिए, अब तुम लोग को ही कुछ करना पड़ेगा …”

और यह पहली बार था जब भारत ने कोई वर्ल्ड सीरीज 1985 के बाद जीती थी.

आप उसकी कप्तानी पर लाख सवाल उठा लें, चाहे वो जोगिंदर को दी गयी बॉल हो या खुद वर्ल्ड कप में ऊपर आकर बैट पकड़ना हो …

फैसलों से उसने तकदीर बदली है और यह बात आप भी जानते हैं कि वह आत्ममोह का मारा नही है…!

0Shares

Leave a Comment

0Shares