Bastar The Naxal Story: फिल्म मेकर्स ऑफ द केरल स्टोरी टीम वापस लौट आई!

Bastar The Naxal Story: फिल्म मेकर्स ऑफ द केरल स्टोरी टीम वापस लौट रही है और इस बार लाल सलाम यानी नक्सलियों की निर्मामता को सिनेमाई पटल पर रखेगी। ट्रेलर शानदार है अच्छा थ्रिल शेप ले रहा है। इसके कुछ दृश्य तो कतई रोंगटे खड़े करने वाले है। अदा शर्मा मुख्य किरदार में दिखाई दे रही है। फिल्म बताएगी कि कंटेंट कैसा है। लेफ्टी वर्ग जो है न, समाज में समानता के नाम पर किस प्रकार भावनाओं को लाल सलाम में कन्वर्ट करके खूनी खेल खेलता आया है। इन विचारों की जन्मभूमि से ही आंकना शुरू करेंगे तो शांति तो दूर दूर तक नजर नहीं आएगी।

Bastar The Naxal Story

सोचें, जिस सरकारी तंत्र और अमीर वर्ग को टारगेट करके गरीब गाँव वालों को बागी बनाते है, हिंसक स्वरूप देते है। जब ये लोग सरकार बनते है तब भी शांति नहीं लाते, क्योंकि इन्हें तो सिर्फ अपने विचार बागियों में जिंदा रखने है ताकि सत्ता मिल सके। जितना खून लेफ्ट ने सत्ता के लिए बहाया है न, उतना दूसरी किसी पार्टी ने नहीं किया होगा। इनकी मौजूदगी वाले सूबे लाल सलाम में लाल हो रखे हैं। इसमें भी कोई संदेह नहीं है।

Bastar The Naxal Story
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सरकारी तंत्र में कुछ लोगों की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में घिनौना व्यवहार किया जाता है। बातें सुनी नहीं जाती है अधिकार भी नहीं मिलते है। ऐसी ही बेरुख़ियों को वामी सेना बागी और बन्दूक के क़रीब ले आते है और रिवेंज की टोपी पहनाकर भिड़ाते है। इससे माहौल अशांत बना रहता है। इसी आग में 2010 बस्तर में 70 जवानों को धोखे से मार दिया था। भारत स्वतंत्र तो हुआ, लेकिन इतनी सारी अशांत समस्याओं के साथ ठीक से खड़ा न हो सका। भारत के मुकुट कश्मीर से लेकर हर सूबे में कुछ न कुछ पंगा लगा ही रहा था।

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पूर्व गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मोदी सरकार के तहत नक्सलवाद पर ध्यान केंद्रित किया और हमले काफी हद तक कम हुए है। बागियों को मुख्य धारा नहीं मिलेगी तब तक समस्या का समाधान नहीं है। शहरों में बैठें कॉमरेड अर्बन नक्सल है। उसका भी पूरा सिस्टम बना हुआ है और राजनीतिक ताकत भी है लेकिन अभी कमजोर पड़ी है। जब थी तो यूनिवर्सिटी में नक्सलियों के समर्थन में नारेबाजी होती थी।

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