अव्वल तो चंद्रयान 3 सच्ची में उतरा भी है कि नहीं इसी पर डाउट होना चाहिए।

अव्वल तो चंद्रयान 3 सच्ची में उतरा भी है कि नहीं इसी पर डाउट होना चाहिए।

क्या पता हमें एक वीडियो-गेम दिखा दिया गया हो!

आखिर आजतक की रिपोर्टर दीदी भी तो चाँद पर चढ़कर न्यूज़ सुना रही थीं, तो
क्या वो सच्ची में…?

और अगर ऐसा हुआ भी है, तो क्या बड़ा काम हो गया? चाँद पर तो अमेरिका कबका आदमी भेज चुका है, हम तो विक्रम नाम देकर ‘रोबोट’ भेज खुश हो रहे हैं!

और अगर चाँद तारा करने की इतनी ही आग लगी थी तो कम से कम पड़ोसियों का तो ख्याल रखते! कायदे से विक्रम लैंडर के साथ चीन की ओर से एक हुआंग इनवेडर और पाक की ओर से एक अब्दुल बॉम्बर भी साथ भेजना चाहिए था न!

पर इस स्वार्थी मुल्क के सवा-स्वार्थी मंत्री-शीर्ष से भाईचारा आप एक्स्पेक्ट भी कैसे कर सकते हैं!

अच्छा रोबोट भी ऐसा भेजा है कि सब कुछ खुद ही कर ले रहा है, खुद उड़ लिया, खुद उतर लिया, खुद ही प्रज्ञान को भेज दिया, वो भी खुद ही चल दिया, सैम्पल्स भी खुद चेक कर रहा है और तस्वीर भी खुद भेज रहा है।

धोनी कह-कह थक गए कि ऑफ-स्टम्प पे डाल या स्टम्प पे रख, पर न जी! कभी बात मानी भला? तो फिर प्रज्ञान ओझा वाले देश में, प्रज्ञान रूवर सब कुछ अपने
आप कैसे कर सकता है? ज़रूर इसमें कुछ चाल है!

चलो ये भी किया सो किया, लेकिन इसका क्रेडिट लेने अंतिम समय पर झंडे संग हाथ हिलाने वाले को बुलाने की क्या ज़रूरत थी? मिशन तो इसरो का था न? तो क्रेडिट किसी मंत्री-प्रधान को क्यों?

वो तो भला हो चाचा प्रधान जी का, जो वो जाते-जाते देश को इसरो दे गए, वर्ना आजतक चाँद को बस छलनी से देखकर मामा-मामा ही कहते रह जाते तुम!

फिर ऐसे मिशन्स का फायदा ही क्या, जहाँ इतनी गरीबी है, इतनी भुखमरी है, इतना कु-प्रशासन है। इतनी बदइंतजामी है। मैं 21वें फ्लोर पर रहता हूँ, पर नेटवर्क नहीं आते! स्टेशन जाने की सोचो तो ऑटो नहीं मिलता! पिछले महीने तक सड़क पर चाँद से मिलते जुलते क्रेटर्स भी थे।

Movierulz (2)

इसरो ने एक बार न सोचा कि पहले इन्हें सुधार लें, वो तो भला हो म्यूनसिपल का!
अच्छा वो भी छोड़ो, आम आदमी के असल मुद्दों की बात करते हैं!

किसी ने ऐमज़ान से हेडफोन मँगवाए तो बस एक कान का ही चलता मिला, रिलायंस से कॉफी खरीदी तो उन्होंने 3 रुपये एक्स्ट्रा चार्ज कर लिए, बताओ ऐसे तो लूटा जा रहा है देशवासियों को!

ऐसे ही 3-3 रुपये करते-करते 615 करोड़ इकट्ठे किए होंगे।

इतने पैसे में आराम से 5 गदर, 2 omg, आधी ब्रह्मास्त्र भी तो बन सकती थीं! उससे कम से कम लोग खुश तो होते!

फिल्म इंडस्ट्री में यश चोपड़ा एक बड़ा नाम थे, हैं और रहेंगे।

1150 वाली बोतल अभी 1520 की मिल रही है। एक दोस्त है उस बिचारे के फोन, टैब, लैपटॉप आदि की बैटरी जल्दी डाउन हो रही है! एक महिला को पेट कम करना था पर उनको होमशॉप 18 ने नकली सोना-बेल्ट भेज दी! सरकार को होश है?

कोई सही गवर्नमेंट होती, तो पहले नालासोपारा के घरों के गमले में जमे पानी से जो मच्छर पनप रहे हैं, उन्हें खतम करने की सोचती, न की चाँद पर नहीं, उड़ना है इन्हें तो, चाँद पर विक्रम बेताल खेलना है!

– एक सच्चा कम्यु+लिबर+सेकु+ I.N.D.I.A सपोर्टर

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