90 के दशक में गोविंदा के नाम की तूती बोलती थी

90 के दशक में गोविंदा के नाम की तूती बोलती थी। हर कमर्शियल फिल्म मेकर उनके साथ काम करने के लिए आतुर रहता था। कॉमेडी हो या ट्रैजडी, एक्शन हो या रोमांस, हर genre में गोविंदा छाए हुए थे।

1998 में गोविंदा की एक फिल्म रिलीज़ हुई थी ‘अचानक’। इस फिल्म में एक सीन याट पर शूट होना था, शॉट सुबह का था, पर गोविंदा दोपहर से पहले सेट पर आते ही नहीं थे।

ऐसे सुबह की दोपहर करते-करते 15 दिन निकल गए, तब डायरेक्टर नरेश मल्होत्रा और प्रोड्यूसर विजय गलानी ने हाथ जोड़े कि हे ‘चिचि प्रभु, बस एक सुबह, एक सुबह टाइम पर आ जाओ, लंच से पहले ही आपको फ्री कर देंगे पर देवता प्रातः काल में दर्शन दे दो’

गोविंदा ने जवाब दिया “अरे ऐसी बात, तू बोल कब आ जाऊँ, नहीं तू बोल, कल सुबह आ जाऊँ? अच्छा एक काम कर, मेरा इधर ताज में एक रूम बुक कर दे। मैं घर जाऊँगा ही नहीं, यहीं रुकूँगा। सुबह-सुबह तेरे सेट पर आ जाऊँगा”

Movierulz (2)

डील डन हो गई। रूम बुक कर लिया गया। अगली सुबह 7 बजे से शॉट की तैयारियां शुरु हुईं। 9 बजे तक मनीषा कोइराला भी आ गईं। 10 बजे तक चिचि भैया उर्फ गोविंदा का इंतेज़ार किया गया। उसके बाद खुद प्रोड्यूसर विजय गलानी गोविंदा को लेने के लिए होटल ताज पहुँचे।

पर वहाँ जाकर मालूम पड़ा कि गोविंदा तो रात यहाँ आए ही नहीं। रूम एवें ही बुक रहा। फिर उन्होंने गोविंदा के घर, जुहू जाने की ठानी। वहाँ गोविंदा मिले और बोले मैं तेरी ही शूटिंग के लिए आ रहा हूँ।

लेकिन तबतक समय 1 के आसपास हो गया। डायरेक्टर ने अर्ली लंच अनाउंस कर दिया। फिर 2 बज गए, फिर 3 बज गए, प्रोड्यूसर खुद सेट पर आ गए तो पता चला कि गोविंदा रास्ते में कहीं और खिसक गए हैं।

4 बजे थके हारे क्रू ने पैकअप किया और अपने-अपने घर चल दिए। इसी क्रू में से एक टीनू वर्मा ने देखा कि चौपाटी पर विल्सन कॉलेज के बाहर भीड़ लगी हुई है। पता चला अंदर शूटिंग चल रही है। उसी शूटिंग में गोविंदा मस्त डांस कर रहे हैं। टीनु वर्मा का कहना है कि जैसे ही गोविंदा की नज़र उनपर पड़ी, गोविंदा अंदर खिसक लिए।

अपनी फिल्मों की ही तरह असल ज़िंदगी में भी एक से दूसरे झूठ पर कूदना और भागमभाग करना, इसकी टोपी उसको पहनना गोविंदा का पसंदीदा काम था। उस रोज़ वह विल्सन कॉलेज में संभवतः डेविड धवन की ‘बड़े मियां छोटे मियां’ का गाना शूट कर रहे थे। ये एक ऐसी फिल्म थी जिसमें अमिताभ बच्चन के होते हुए भी उनके को-स्टार यानी गोविंदा दर्शकों की सारी तारीफ़ें ले गए थे। पर कास्ट और क्रू के लिए असली हीरो अमिताभ बच्चन ही थे। नहीं इसलिए नहीं कि वो सीनियर एक्टर थे, बल्कि इसिलए कि वो टाइम के इतने पाबंद थे कि कभी किसी को इंतेज़ार नहीं करवाते थे।

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अमिताभ बच्चन के लिए आज भी कहा जाता है कि अगर 10 बजे का शूट है तो सबसे पहले सेट पर वही हाज़िर मिलते हैं। आज भी को-स्टार्स के साथ रीहर्सल कर लेने में उन्हें कोई हिचक नहीं होती।

दूसरी ओर गोविंदा ने न समय की कद्र की, न ही अपने साथी कलाकारों की, न ही डायरेक्टर/प्रोड्यूसर को कुछ समझा। वक़्त देखिए कैसा पलटा कि हर जगह छाए रहने वाले गोविंदा को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने का निमंत्रण तक नहीं मिला। वहीं बच्चन साहब 81 की उम्र में भी पूरे दिन टीवी न्यूज़ पर छाए रहे।

खैर, अभी थोड़ी देर पहले नई वाली बड़े-मियां छोटे-मियां का ट्रैलर देखा। इसमें अक्षय और टाइगर श्रॉफ बेसिरपैर के dialogues बोलते और एक्शन करते नज़र आ रहे हैं।

अक्षय एक्टिंग के मामले में गोविंदा से 18 होंगे पर समय की सही कीमत समझना उन्हें बाखूबी आता है। तभी देखिए, लगातार 7 फ्लॉप देने के बाद भी अक्षय की 7 और फिल्में रिलीज़ के लिए लाइन लगाए खड़ी हैं।

बहरहाल, बचपन में टीवी पर गोविंदा की फिल्में देखकर हँसी से लोटपोट होने वाले हम आज जब उबला मुँह लिए छोटे मियां को ऑनलाइन गेमिंग एप और जालिम लोशन का विज्ञापन करते देखते हैं तो ज़रा दुख तो होता है, पर साथ ही समझ भी आता है कि समय और रिश्ते, दोनों ही बहुत कीमती हैं, इनकी कद्र नहीं की तो कहीं के नहीं रहेंगे।

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