2009 में ब्लू सबसे महँगी फिल्म थी

कुछ फिल्मों को लेकर मेरा आँकलन स्पष्ट है, लेखक वरुण ग्रोवर के वीडियो से विश्लेषण को पुख्ता किया है, ‘कि आपकी पहली फिल्म कोई नहीं बनाना चाहता है लेकिन दूसरी फिल्म बना देंगे, पहली तो आपको ही बनानी पड़ेगी’ फिल्म मेकर एंथोनी डिसूजा को पहचानते होंगे। नहीं पहचाने, अरे वही 2009 में 75 करोड़ की ब्लू फिल्म बनाई थी और ऑस्ट्रेलियाई सिंगर कायली मिनोग से चिग्गी-विग्गी करवाया था।

2009 में ब्लू सबसे महँगी फिल्म थी। फिल्म की कमांड डिब्यूटेंट एंथोनी डिसूजा के हाथों में था जिन्होंने फिल्म निर्देशन छोड़िये, असिस्ट भी नहीं किया था। नौसिखिए निर्देशक के हवाले 75 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट थमा दिया गया। अक्षय कुमार, संजय दत्त और राहुल देव बड़े बड़े चेहरे भी प्रोडक्शन कॉस्ट न निकाल सके। तिस पर दीवाली रिलीज थी। ऐसे कंटेंट स्कैम फॉर्मेट में आते है।

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काले को सफ़ेद में परिवर्तित करने के लिए ब्लैंक कंटेंट बनाए जाते है। इस फार्मूला को सरल शब्दों में समझाना है तो कुणाल खेमू और परेश रावल की ‘ढूँढते रह जाओगे’ देखें। चार्टर्ड अकाउंटेंट आनंद पवार किस प्रकार निर्माता राज चोपड़ा को फ्लॉप फिल्म से 100 करोड़ कमाने की स्कीम बतलाता है। अलग-अलग 21 फाइनेंसर से 5 करोड़ लेंगे। कुल 105 करोड़ का बजट इक्कट्ठा होगा। उसमें से 5 करोड़ की फिल्म बनायेंगे और 100 करोड़ अंदर। पूरा खेला कानूनी ढंग से अंजाम देते है।

यकीनन भूषण कुमार और ओम राउत ने इस फिल्म को देखा, और फिर आदिपुरुष बनाने निकले और बहुत बड़ा स्कैम कर डाला। फिल्म इंडस्ट्री में इस तरह के खेल चलते रहते है और इस कार्य के लिए पूरी टीम है। भाई-बहन निर्देशक जोड़ी, सामजी, कोरियोग्राफर निर्देशक आदि मालूम है ये लोग बिग स्केल बजट में ही फिल्म बनाते है और इनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर डब्बा होती है। फिर भी बजट अलॉटमेंट होते रहता है। ब्लू जो थी न! स्कैम कैटेगरी में आई थी। जिस इंडस्ट्री में पहली फिल्म बड़ी मुश्किल से मिलती है वहाँ पप्पू लोग हाई बजट डेब्यू फिल्म बनाते है।

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