स्वतंत्रता वीर सावरकर के लिए अभिनेता रणदीप हुड्डा ने अपनी बॉडी में स्पेस बनाया

स्वतंत्रता वीर सावरकर के लिए अभिनेता रणदीप हुड्डा ने अपनी बॉडी में स्पेस बनाया ताकि उन्हें जगह दे सके। 70एमएम पर सावरकर के त्याग को दर्शकों के बीच रख सकें। प्री-प्रोडक्शन मने किरदार की तैयारी वाली फोटो साँझा की है। जब रणदीप हुड्डा ने सरबजीत के लिये ऐसा ही मेथड अपनाया था और अपने किरदार के लिए इतना भीतर उतर गये थे तब रणदीप नहीं, सरबजीत दिखाई दे रहा था।

स्वतंत्रता वीर सावरकर

लेकिन अफसोस फिल्म की लाइम लाइट ऐश्वर्या बच्चन लूट ले गई थी, उन दिनों कम बैक मोड़ में थी। तो मीडिया की निगाहें ऐश पर ही टिकी हुई थी। सरबजीत से ज्यादा उनकी बहन वाले किरदार मने ऐश्वर्या को तवज्जो दी गई।
फिर रणदीप बैटल ऑफ सारागढ़ी के ईश्वर सिंह के लिए दो-तीन साल मेहनत की, परंतु फ़िल्म ही डब्बा बंद हो गई। पूरी कसरत बेकार रही। हुड्डा कलाकार है किरदारों से मिलते है, समझते और दर्शकों के बीच रखते है। अब सावरकर से मिल रहे है तो मंथरा वर्ग को बुरा लग रहा है।

इस पर रणदीप हुड्डा खूबसूरती से प्रतिउत्तर देते है, कलाकार जब किरदार से मिलता है तब उसकी कोई विचारधारा नहीं होती है, सिर्फ किरदार होता है उसकी कहानी व विचारधारा है। तो कलाकार उसे ही फॉलो करता है। कल कोई सावरकर विचारधारा से उलट किरदार मिलेगा और लगेगा मिलना चाहिए तो कलाकार की हैसियत से अवश्य मिलूँगा। कलाकार यही कर्तव्य और धर्म है। कोई असल किरदार है उसकी जीवनी में जा रहे है तो उसे जानना पड़ता है तभी न्याय होता है। सावरकर को अच्छे से जाना है और लगा बहुत कम पढ़ाया गया है। उनके पीछे के सच से ज़्यादा झूठ का पुलिंदा घूम रहा है।

स्वतंत्रता वीर सावरकर

स्वतंत्रता वीर सावरकर


स्वतंत्र वीर सावरकर फिल्म का सारा क्रेडिट रणदीप के हिस्से में लिखा जाएगा। क्योंकि लेखक-निर्देशक-अभिनेता हुड्डा ही है और फिल्म दर्शकों से कनेक्ट कर गई तो करियर की बड़ी फिल्म दर्ज होगी। निर्देशन में स्कोप खुलेगा, निर्माता बढ़िया कंटेंट ऑफर करेंगे। रणदीप ने फिल्म में उन सभी पहलुओं को रखा है, जिसे रखने की हिम्मत चाहिए। मंथरा वर्ग के सिस्टम को पसंद न आएगी। बॉलीवुड में भी तो सिस्टम के सिपाहसलार बैठें है।


स्वतंत्रता वीर सावरकर की सफलता काफी हद तक बॉलीवुड के सिंडिकेट यानी सिस्टम को क्रैक कर देगी। अर्थात् बैटल ऑफ सारागढ़ी बंद करनी पड़ी थी, जबकि इस फिल्म के निर्देशक भी छोड़कर भाग गए थे। फिल्म मेकिंग स्किल भी जुड़ जाएगी तो रणदीप अपने कंटेंट स्वयं तय कर सकेंगे।


2014 के बाद जितनी भी हिन्दी फिल्में आई है, जिन्होंने उन सच को उजागर किया है जिन्हें सिस्टम ने दबाए रखा, या प्रॉपगैंडा कंटेंट से सच को निरस्त करने की कोशिशें की। इन कंटेंट के पीछे कोई बड़ा प्रोडक्शन हाउस खड़ा नहीं हुआ। द कश्मीर फ़ाइल्स, द केरला स्टोरी, बस्तर-नक्सल स्टोरी, अब वीर सावरकर, सभी कंटेंट छोटे निर्माता लाये। हालाँकि स्टोरी में विपुल शाह बड़ा नाम अवश्य है लेकिन फिल्म से बड़ा कलाकार कोई नहीं जुड़ा था।

आदित्य धर साइंस फिक्शन फिल्म The Immortal Ashwatthama बनाने जा रहे थे

स्वतंत्रता वीर सावरकर रणदीप हूड़ा की ऐतिहासिक पेशकश को समझने के लिए इतना समझें


डीडी कंगना अपने प्रोडक्शन में निर्मित इमरजेंसी की रिलीज के लिये जुगाड़ बैठा रही है लेकिन कोई फायदा होता नहीं दिख रहा है। फिल्म रिलीज के लिये डिस्ट्रिब्यूटर्स चाहिए। शायद उसी की तलाश में बैठी है। न कोई अपडेट है। बॉलीवुड में सिस्टम के खिलाफ लड़ना आसान बात नहीं है। अव्वल ग्रुप में विभाजित है, दूसरी पंगे ले रखें है। तिस पर कंटेंट ऐसा है जो सिस्टम ने वायरस शो कर रखा है तो कौन आगे आएगा। बाकी देखते है इस साल सिल्वर स्क्रीन पर आपातकाल घोषित होगा या नहीं।

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