लेखक वरुण ग्रोवर अपनी पहली फिल्म ‘ऑल इंडिया रैंक’ लेकर आ रहे है

यकीनन फिल्म बनाना बहुत बड़ा कार्य है तिस पर पहली फिल्म हो।सैकड़ों क्रू मेंबर्स की कड़ी मेहनत से दो-ढाई घंटे का स्क्रीन प्ले शेप लेता है। लेखक वरुण ग्रोवर अपनी पहली फिल्म ‘ऑल इंडिया रैंक’ लेकर आ रहे है। फिल्म के प्रमोशन में वरुण ग्रोवर ने बहुत मार्मिक वीडियो जारी किया है और दर्शकों से फिल्म देखने की भारी अपील की है। या कहे विक्टिम कार्ड खेला है।

ऑल इंडिया रैंक के कंटेंट पर नजर डालेंगे तो कुछ भी नया नहीं है बीते दिनों विधु विनोद चोपड़ा की हालिया पेशकश ‘12th फेल’ देखी। कमोबेश सेम थीम और कहानी वरुण ने लिखी है बल्कि मुख्य किरदार की माँ भी 12th फेल वाली कलाकार गीता अग्रवाल शर्मा को रखा है।

अर्थात् दोनों ही कहानियों में इनके बेटे को परिवार से दूर पढ़ने जाना है, प्यार करना है, सभी सिचुएशन देख रखी है तो दर्शक ऑल इंडिया रैंक को काहे देखेंगे। मुझे इसका ट्रेलर भी फ्रेशनेस न दिया, यूँ लगा फिल्म देख रखी है। दूसरी ओर फिल्म की रिपोर्ट बहुत डाउन निकली है। बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन के सभी शो चला लें, बहुत बड़ी बात है। कंटेंट में दम होता है न, तब ऐसे वीडियो न डालने की नौबत न आती है।

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वरुण ग्रोवर कलाकार है और इन्हें निष्पक्ष होना चाहिए। लेकिन कतई नहीं है, 2019 में सीएए पर “हम कागज नहीं दिखाएँगे” कविता पाठ किया था, जबकि मुद्दा सीएए था और इन्होंने मंथरा वर्ग के साथ मिलकर लोगों में भ्रम फैलाने की कोशिश की और शाहीन बाग में बिरयानी मीटिंग जुटी थी।कलाकारों ने सदैव निष्पक्ष होकर मुद्दे पर मुखरता से राय व्यक्त करनी चाहिए। एजेंडा-नैरेटिव में आयेंगे तो लोग भी देख रहे है कि आपका स्टैंड क्या है। बॉलीवुड के मंथरा वर्ग के साथ वरुण ने खड़ा रहना चुना और निष्पक्षता को खूँटी पर टाँग दिया।

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शायद पुरस्कार में पहली फिल्म का जुगाड़ बैठ गया। मेरा स्पष्ट मत है कि मौका परस्ती ज्यादा नहीं चलती है। इसलिए अपना स्टैंड क्लियर रखें, दोगलापन स्वास्थ के लिये हानिकारक है। वरुण अपनी फिल्म का निमंत्रण उन्हें दिये हो? जिनके हक में कागज नहीं दिखाएँगे लिखे थे। उन्हें कहिए फिल्म देख लेंगे और ब्लॉकबस्टर भी करवा देंगे। यहाँ बस टिकट ही दिखानी पड़ेगी। काम हो जाएगा।

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