माला सिन्हा: हिंदी सिनेमा की चमकती रत्न

माला सिन्हा: हिंदी सिनेमा की चमकती रत्न – माँला सिन्हा भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर की एक चमकती रत्न थीं। उन्होंने हिंदी, बंगाली और नेपाली फिल्मों में अपनी अदाकारी से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वह अपने अभिनय कौशल, लाजवाब सौंदर्य और विविध भूमिकाओं को बखूबी निभाने के लिए जानी जाती थीं। चार दशक से भी लंबे फिल्मी सफर में उन्होंने अनगिनत यादगार किरदार निभाए और हिंदी फिल्म जगत पर अपनी अमिट छाप छोड़ी।

माला सिन्हा: हिंदी सिनेमा की चमकती रत्न

11 नवंबर 1936 को कोलकाता में जन्मीं माँला सिन्हा का असली नाम एल्डा सिन्हा था। उनके पिता अल्बर्ट सिन्हा नेपाली थे और माता शांति देवी भारतीय ईसाई परिवार से थीं। स्कूल के दिनों में उनके सहपाठी उन्हें “डाल्डा” (एक वनस्पति तेल का ब्रांड) कहकर चिढ़ाते थे, इसलिए उन्होंने अपना नाम बदलकर “बेबी नाजमा” कर लिया। बाद में फिल्मों में आने पर उनका नाम माला सिन्हा रखा गया।

माँला सिन्हा का फिल्मी सफर 1952 में बंगाली फिल्म “रॉशनारा” से शुरू हुआ। 1954 में उन्होंने हिंदी सिनेमा में “बादशाह” फिल्म से कदम रखा। हालांकि, उन्हें असली पहचान 1957 में गुरु दत्त की फिल्म “प्यासा” से मिली। यह फिल्म उनकी सफलतम फिल्मों में से एक मानी जाती है।

माला सिन्हा
माला सिन्हा: हिंदी सिनेमा की चमकती रत्न

इसके बाद माँला सिन्हा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने “धूल का फूल” (1959), “अनपढ़” (1962), “हरियाली और रास्ता” (1962), “गुमराह” (1963), “जहाँ आरा” (1965), “हिमालय की गोद में” (1965), “आँखें” (1968), “प्यार का मौसम” (1969) और “मर्यादा” (1971) जैसी कई सफल फिल्मों में अभिनय किया।

माँला सिन्हा की फिल्मों ने न सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन किया बल्कि समाज में महत्वपूर्ण मुद्दों को भी उठाया। “अनपढ़” में उन्होंने एक अनपढ़ महिला की भूमिका निभाई जो शिक्षा प्राप्त करने के लिए संघर्ष करती है। “जहाँ आरा” में उन्होंने मुगल साम्राज्ञी की दमदार भूमिका निभाई। वहीं “गुमराह” में उन्होंने एक विवाहिता महिला के विवाहेतर संबंधों के जटिल विषय को पर्दे पर बखूबी उकेरा। इन फिल्मों के अलावा उन्होंने हास्य, रोमांस, थ्रिलर और ऐतिहासिक फिल्मों में भी शानदार अभिनय किया।

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माँला सिन्हा ने अपने दौर की कई बड़ी हस्तियों के साथ काम किया, जिनमें देव आनंद, दिलीप कुमार, राज कपूर, किशोर कुमार, धर्मेंद्र और राजेंद्र कुमार जैसे नाम शामिल हैं। उन्होंने 1960 और 1970 के दशक में सबसे अधिक फीस लेने वाली अभिनेत्रियों में से एक होने का गौरव भी हासिल किया। बॉलीवुड को उन्होंने जो अमूल्य योगदान दिया है, उसके लिए उन्हें सराहा जाता है। उन्होंने न सिर्फ दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया बल्कि समाज में महिलाओं की शिक्षा और स्वतंत्रता जैसे मुद्दों को भी फिल्मों के माध्यम से उठाया।

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