बीते दिन धर्मा की एक्शन-थ्रिलर ‘योद्धा’ का ट्रेलर देखा, जस्ट औसत है

जानते है करण जौहर यानी धर्मा प्रोडक्शन के पास नितिन गोखले की पुस्तक ‘जेंटलमैन स्पाई मास्टर’ आरएन काव के अधिकार है, 2019 में खरीदे थे। लेकिन अभी तक इससे जुड़ा कोई कंटेंट फ्लोर पर नहीं है। बीते दिन धर्मा की एक्शन-थ्रिलर ‘योद्धा’ का ट्रेलर देखा, जस्ट औसत है। बॉलीवुड के बड़े बड़े प्रोडक्शन हाउस बदलते माहौल को देखते हुए, राष्ट्रवाद और देशभक्ति कंटेंट बना रहे है न, उनमें असल घटनाक्रम की बजाय काल्पनिक अधिक है या कहे असलियत से प्रभावित होकर खास एजेंडे में लाएँगे और उस कंटेंट को बर्बाद कर देते है।

यशराज की स्पाई यूनिवर्स महज कूड़ा है। बॉलीवुड का एजेंडा और नैरेटिव कूट कूट कर भरा जाता है। बड़े मियाँ छोटे मियाँ भी ऐसा ही कंटेंट है लुढ़क जाये तो हैरानी न होगी। ऊरी और आर्टिकल-370 देखें तो बैलेंस ड्रामे में रियल को प्राथमिकता दी गई है। धर्मा की शेरशाह ठीक थी और दर्शकों से कनेक्ट भी कर गई, क्योंकि विक्रम बत्रा के पलों को ज्यादा ड्रामेटिक नहीं किया था।

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ऐसे कंटेंट कम ड्रामे में बढ़िया रहते है। आर्टिकल-370 जिस अंदाज में बॉक्स ऑफिस पर रेड कर रही है, तिस पर लीड में यामी गौतम है। योद्धा ऐसा कतई न कर पाएगी, भले राष्ट्रवाद है। दरअसल, दर्शक कल्पना से अधिक देश के वीर योद्धाओं की गौरव गाथा देखने के इच्छुक है। पर्दे के पीछे खड़े सच को बाहर देखना चाहते है कि आखिर कैसे हुआ होगा। यमन, कतर वाले घटनाक्रम में भी देश की काबिलियत को देखने की इच्छा है।

अक्षय कुमार थोड़ी कोशिश अवश्य करते है लेकिन कमोबेश एक ही लुक में सभी किरदार कर देने से बोर कर जाते है। बाकी रानीगंज अच्छी थी। फाइटर में बालाकोट लिया था, लेकिन विंग कमांडर अभिनंदन वाले सीक्वेंस को कूड़ा कर गये। जबकि रियल के साथ ड्रामे का संतुलन बनाते तो फाइटर ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर होती। जॉन की रॉ याद है। रोमियो, अकबर, वॉल्टर फिल्म से ब्लैक टाइगर रवींद्र कौशिक के स्पाई गाथा को सिरे से सेकुलरिज्म में लाकर बिगाड़ दिया।

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