फिल्म ब्लाकबस्टर लोडिंग है और इसकी सफलता से इन्हें आदित्य के टैलेंट का अनुभव हो जाएगा

मेरा आँकलन है कि आदित्य धर ने कॉर्पोरेट जगत को अपनी हालिया रिलीज ‘आर्टिकल-370’ से बड़ी अच्छी तरह से समझाया है कि फिल्मों में कहानी और किरदार नायक होते है। न कि बड़े बड़े चेहरे, जिस कंटेंट में स्क्रिप्ट-स्क्रीन प्ले हीरो होती है उन्हें बॉक्स ऑफिस चू तक न बोल पाता है। दरअसल, इनके पीछे एक्सट्रीली पॉजिटिव वर्ड ऑफ माउथ चलता है तो बॉक्स ऑफिस होश में नहीं रहता है।

आदित्य ने अपनी फिल्म का नेतृत्व पत्नी अभिनेत्री यामी गौतम व प्रियामणि को देखकर बतलाया कि हमारे कंटेंट की नायक कहानी है और इसके किरदारों जुनी हकसर व राजेश्वरी स्वामीनाथन को यामी और प्रिया दर्शकों के सामने रखेंगी। बड़े चेहरों के बीच कहानी और किरदार गुम हो जाते है इसलिए उन्हें प्राथमिकता देने के लिए हीरो नहीं, कलाकार चुने जाते है जो कहानी व किरदार को समझे, उनकी डिमांड के हिसाब से स्वयं को ढाले, न कि खुद को उनसे बड़ा समझे।

जियो ने आदित्य के ड्रीम प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया है क्योंकि उसे विक्की कौशल लाने वाले थे और कॉर्पोरेट को बड़ा चेहरा चाहिए था आर्टिकल-370 ने पहले दिन अपने बॉक्स ऑफिस में 6 करोड़ प्लस किए है और प्रोडक्शन बजट 20 करोड़ है। जानते है ऐसे माहौल में बजट बेहतरीन क्वालिटी पर खर्च होता है, कलाकारों की फी सीमित होती है और बजट का अधिकतर हिस्सा फिल्म में ही लगता है। बजट भी लिमिटेड होता है।

Movierulz Wap (1)

अगर इसी फिल्म को बड़े चेहरों के साथ लाते तो बजट 100 करोड़ पार होता। तिस पर कहानी डिस्टर्ब होती। आदित्य ने 25 करोड़ की ऊरी 300 करोड़ी बनाई थी। उसमें भी कोई बड़ा चेहरा न था। सिर्फ कहानी बड़ी थी। महिला केंद्रित कंटेंट में निर्माता या तो बड़ी हीरोईन लेंगे या फिर ओटीटी शेप कंटेंट देंगे। बॉक्स ऑफिस रिलीज बहुत मुश्किल रहती है।

आपको मालूम है डीडी मणिकर्णिका के बाद अपने आप को बहुत बड़ा समझ ली थी। उन्हें लगा कोई भी कंटेंट उठा लाए, सब सोलो बॉक्स ऑफिस फोड़ दूँगी। लुढ़क गई। आदित्य धर भी ऊरी से रातोंरात लाइम लाइट लिए थे हालाँकि लेखन और असिस्टेंट डायरेक्टर कर रहे थे। परंतु सोलो सफलता ऊरी में मिली। सक्सेस को धरातल पर ही इंजॉय किया और अगले कंटेंट में कोई जल्दबाजी न की। ड्रीम अश्वत्थामा में जुटे रहे, लेकिन आर्थिक परिस्थितियाँ हक में न बैठी तो उसे छोड़कर छोटे छोटे कंटेंट में लग गये। इसी कड़ी में आर्टिकल 370 आई है।

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इस फिल्म के पीछे जियो ही है। फिल्म ब्लाकबस्टर लोडिंग है और इसकी सफलता से इन्हें आदित्य के टैलेंट का अनुभव हो जाएगा कि ऊरी महज तुक्का न था। यशराज के स्पाई यूनिवर्स की फीमेल फील्ड एजेंट को देखें और आदित्य द्वारा प्रस्तुत एजेंट देख लें। दोनों में कतई स्पष्ट फर्क दिखलाई देगा। बिन टाँगे और शरीर दिखाकर भी एजेंट मिशन कर सकती है। आदित्य ने अभिनेत्रियों को शालीन तरीक़े से सशक्त महिला किरदारों में पेश किया है। बाकी फिल्म मेकर्स जबतक हीरोइन को बिकनी और किसिंग न करवा लें, उन्हें लगता ही नहीं, फिल्म में एक्ट्रेस है।

विश्वास न हो तो सिद्धार्थ आनंद को देखें, दीपिका को बैक टू बैक बीच पर बिकनी में नचाया है। तिस पर फील्ड एजेंट व ऑफिसर किरदार लेकर आई थी कुछ कंटेंट की मर्यादा होती है उन्हें उसी में फिल्माया जाता है चाहे काल्पनिक ही क्यों न हो। ख़ैर, आदित्य धर ही बालाकोट एयर स्ट्राइक को बढ़िया स्वरूप में सिनेमाई पटल पर ला सकते है।

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